About the Author
दिव्य प्रकाश दुबे ने छह बेस्ट सेलर किताबें—‘शर्तें लागू’, ‘मसाला चाय’, ‘मुसाफ़िर Cafe’, ‘अक्टूबर जंक्शन’, ‘इब्नेबतूती’ और ‘आको-बाको’—लिखी हैं। ‘स्टोरीबाज़ी’ नाम से कहानियाँ सुनाते हैं। दिव्य प्रकाश आवाज़ की दुनिया का एक जाना-पहचाना नाम बन चुके हैं। Audible के लिए ‘पिया मिलन चौक’, ‘दिल लोकल’ और ‘दो दुनी प्यार’ जैसे मशहूर शो प्रस्तुत कर चुके हैं। दस साल कॉरपोरेट दुनिया में मार्केटिंग तथा एक लीडिंग चैनल में कंटेंट एडिटर के रूप में कुछ साल माथापच्ची करने के बाद अब वह एक फ़ुलटाइम लेखक हैं। मुंबई में रहते हैं। कई नए लेखकों के साथ ‘रायटर्स रूम’ के अंतर्गत फ़िल्म, वेब सीरीज़ और ऑडियो शो विकसित करते हैं।




![Deewar Mein Ek Khidki Rahti Thi । दीवार में एक खिड़की रहती थी [ साहित्य अकादमी पुरस्कार से पुरस्कृत उपन्यास ] Hindi Edition by Vinod Kumar Shukla (Author)](https://vishakha.kicedu.in/wp-content/uploads/2026/08/41Qsxm2T-XL._SY445_SX342_FMwebp_-290x300.webp)







vishakha –
Musafir Café by Divya Prakash Dubey is a contemporary romantic and philosophical fiction novel about bucket lists, modern relationships, and the weight of personal choices